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Author: Yogacharya Dhakaram

Founder of YogaPeace Sansthan, Yogacharya Dhakaram is an internationally acclaimed yoga teacher and healer with over 30 years of experience. He has trained thousands of students in yoga and is known for his depth of knowledge and his ability to turn around lives with yoga.

पादहस्तासन

अर्थ-

इस आसन में पांव (पाद) को हाथों (हस्त) से पकडते हैं इसलिए इसे पादहस्तासन या हस्त पादासन कहते है।

विधि-

दोनों पैरों की एडी ओर पंजे मिलाकर खड़े हो जाइये। दोनों हाथों को बगल से उठाते हुये कन्धे के बराबर लाकर हथेलियों का रूख पलटकर आसमान की ओर करें और हाथों को ज्यादा से ज्यादा तान दें। श्वास भरते हुये अपने हाथों को लगातार तानते हुये ऊपर की ओर सीधा तान दें। सिर को पीछे की ओर झुकाते हुये दृष्टि दोनों के बीच से ऊपर की ओर कर दें। दृष्टि दोनों हाथों के बीच रखते हुये, हाथों को लगातार तानते हुये, कूल्हों के जोड़ से सामने की ओर झुकंे। दृष्टि सामने एवं पीठ को सीधा रखते हुये ज्यादा से ज्यादा सामने की ओर झुक जाये और पैरों की एडियों को पकड लें। अब अपने सीने को जांधों से लगाने का प्रयास करें, अगर लग जाये तो ललाट से घुटनों को छूने का प्रयास करें। इस स्थिति में एक मिनट कर रूकने के बाद धीरे-धीरे विपरीत क्रम में वापस लौटे और समस्थिति में खड़े होकर विश्राम करें।

लाभ-

यह आसन कमर दर्द, घुटने का दर्द एवं साईटिका के

दर्द में आराम प्रदान करता है और मेरूदण्ड की जड़ता को कम करता है। यह आसन हृदय की धड़कन को सामान्य कर मेरूदण्ड की शिराओं को नवचेतना प्रदान करता है। अर्धशीर्षासन का भी काम करता है क्योंकि इसमें रक्त का संचार मस्तिष्क की छोटी से छोटी कोशिकाओं में हो जाता है। अतः यह मानसिक रोगों में भी अत्यन्त लाभप्रद है।

सावधानी-

जब तक छाती जांधों से नहीं लगे दृष्टि सामने की ओर ही रखें लेकिन गर्दन पर अनावश्यक तनाव नहीं आने दें। ललाट को धुटनों पर लगाने हेतु जबरदस्ती नहीं करें अन्यथा कमर पर दबाब आ सकता है। घुटनों की मांसपेशियों को संकुचित (टाईट) करके रखे। सरवाइकल स्पोंडिलाइटिस वाले लोगों को यह आसन गर्दन को

सामान्य रखते हुये करना है। घुटनों मंे दर्द हो तो हल्का सा घुटना मोडकर अभ्यास कर सकते है। यह आसन करते समय दोनों पैरों में समान वजन रखने का प्रयास करना चाहिये इसके लिए आप अपने नितम्बो को संकुचित कर सकते है। जब आप सामने झुकें तो इस बात का विशेष ध्यान रखें की टांगें जमीन से लम्बवत रहें न तो आगे की तरफ झुके और ना ही पीछे की तरफ।

उत्थित पाश्र्व कोणासन

अर्थ-

उत्थित यानि खड़ा, अतः खडे़ होकर किये जाने वाले आसनों के नामों में उत्थित शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इस आसन में हम खड़े होकर अपने शरीर के एक पाश्र्व या तरफ (बगल) में कोण बनाते हैं, अतः इसे उत्थित पाश्र्व कोणासन कहते है।

विधि-

दोनों पैरों में चार से साढे चार फीट का फासला रखकर खड़े हो जायें। दाहिने पैर के पंजे को स्थिर रखते हुये एड़ी को उठाकर अन्दर की तरफ 90 डिग्री के स्थान पर रखे दें, ताकि यह बांये पांव से एक समकोण की स्थिति में आ जाये। बांये पैर की एडी को स्थिर रखते हुये पंजे को उठाकर अन्दर की ओर 60 डिग्री के स्थान पर रखे दें। इसके बाद, दाहिने पैर को घुटने से मोडते हुये, जांध को जमीन के समानान्तर ले आयें। ध्यान रखें कि घुटना टखने से आगे नहीं जाये। शरीर का 70 से 80 प्रतिशत वजन दाहिनी जांध पर डालते हुये, दाहिने हाथ को कोहनी से मोडकर जांध पर रख दें। इसके पश्चात् बांये हाथ को उठाकर सिर से उपर ले जायें और बांये कान से लगाकर इस प्रकार तान दें कि बांये पैर के पंजे से लेकर हाथ की अंगुली तक एक सरल रेखा में आ जाये। अब बांये पैर को जमीन की तरफ और हाथ को उपर की तरफ लगातार तानते हुये इस स्थिति में एक मिनट तक रूके। धीरे-धीरे विपरीत क्रम में वापस लौटकर यही क्रिया दूसरी ओर भी एक मिनट तक करें। समस्थिति में विश्राम करें।

लाभ-

टखनों, घुटनों एवं जांघों को ठीक करता है। पिण्डलियों व जांघों की त्रुटियां ठीक करता है। सीना विकसित करता है। कमर व नितम्बों की मोटाई कम करता है। साईटिका का दर्द दूर करता है। नस नाडियों की वेदना को कम करता है इससे आंतों की क्रमाकुंचन क्रिया में वृद्धि के द्वारा मल विसर्जन में सहायता मिलती है।

सावधानी-

जो लोग यह आसन किसी कारणवश नहीं कर सकते हैं वे दीवार के सहारे से भी कर सकते है। आसन करते समय दृष्टि अपनी बाहों की तरफ रखें। गर्दन पर किसी भी प्रकार का तनाव नहीं होना चाहिये। अगर तनाव हो तो गर्दन को सामान्य रखियें।

उत्थित त्रिकोणासन

अर्थ-

इस आसन में हम उत्थित (खडे) होकर शरीर से एक त्रिकोण की रचना करते है अतः इसे उत्थित त्रिकोणासन कहते है।

विधि-

दोनों पैरों में तीन से साढे तीन फीट का फासला रखकर खडे़ हो जायें। दाये पैर के पंजे को स्थिर रखते हुये एड़ी को उठाकर अन्दर की तरफ 90 डिग्री के स्थान पर रखे ताकि दायां पैर, बाॅये पैर के साथ एक समकोण बना ले। अब बाॅये पैर की एड़ी को स्थिर रखते हुए पंजे को उठाकर अन्दर की तरफ 60 डिग्री के स्थान पर रख दें। दोनों हाथों को बगल से उठाकर कंधांे की ऊंचाई तक लायें और हथेलियों का रूख जमीन की ओर रखते हुये दोनों ओर अधिकतम तान दें। अब शरीर को कमर से मोड़ते हुये दाहिनी तरफ झुकें और दांये हाथ के पंजे को दांये पैर के पंजे के पास, पीछे की तरफ जमीन पर रख दें। इस स्थिति में आपके बाये हाथ का रूख आसमान की तरफ हो जायेगा और दोनों हाथ एक सरल रेखा की स्थिति में हो जायेंगे। दृष्टि बांये हाथ की हथेली की ओर कर दें। अब दोनों हाथों को विपरीत दिशा में तानते हुये सीने को ज्यादा से ज्यादा फैला दें। इस स्थिति में एक मिनट तक रूकें। विपरीत क्रम में लौटकर, यही क्रिया दूसरी ओर करें। समस्थिति में विश्राम करें।

लाभ-

पैरों की किसी भी प्रकार की कमजोरी जैसे एडी का दर्द, पिण्डलियों का दर्द एवं घुटनों के दर्द को ठीक करता है, साथ-साथ पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करता है। पीठ, कमर एवं गर्दन के दर्द को ठीक करता है। टखनों को पुष्ट एवं सीने को विकसित करता है।

सावधानी-

सरवाइकल स्पोंडिलाइटिस वाले लोगों को यह आसन गर्दन को नीचे की तरफ रखते हुये करना है। घुटनों मंे दर्द हो तो हल्का सा घुटना मोडकर अभ्यास कर सकते है। यह आसन करते समय दोनों पैरों में समान वजन रखने का प्रयास करना चाहिये इसके लिए आप अपने नितम्बांे को संकुचित कर सकते है। जब आप बगल में झुकें तो इस बात का विशेष ध्यान रखें की शरीर न तो आगे की तरफ झुके और ना ही पीछे की तरफ।

ताड़ासन

अर्थ: इस आसन में शरीर को तानकर ताड़ के वृक्ष की तरह लम्बा और सीधा करते है, अतः इसे ताड़ासन कहते है।

विधि: दोनों पैरों के एड़ी व पंजों को मिलाकर सीधे खड़े हो जाए, कंधों को थोडा सा पीछे खींचते हुये अपना सीना थोडा बाहर निकाले। दोनों हाथों को कंधों से अंगुलियों की तरफ तानते हुये धीरे-धीरे बगल से ऊपर उठायें। कंधों के बराबर लाने के बाद कंधों के जोड से हाथ को धुमाते हुये, हथेलियों का रूख पलटकर आसमान की ओर कर दें। अब अपने हाथों को दोनों पाश्र्व में ज्यादा से ज्यादा तानते हुये अपनी छाती, कंधे, कोहनी, कलाई एवं अंगुलियों तक के हर जोड में खिंचाव महसुस करें। श्वास भरते हुये हाथों को लगातार तानते हुये ऊपर की ओर ले जायें एवं सिर के ऊपर ले जाने के बाद दोनों हाथों की अंगुलियां आपस में फंसाकर हथेलियों का रूख पलटकर आसमान की ओर कर दें अब हाथों को ज्यादा से ज्यादा उपर की तरफ तानते हुये अपने घुटनों एवं कुल्हों की मांसपेशियों को संकुचित कर लें। पेट को अन्दर खींचते हुये छाती फुलाये और अपने हाथों को थोेड़ा और तान दें। इस स्थिति में (खिंचाव बरकरार रखते हुयेे) आँखें बन्द करके अपना पूरा ध्यान शरीर के खिंचाव पर रखते हुये स्थिरता से एक मिनट रूके रहं। (श्वास सामान्य रहेगा) विपरीत क्रम में वापस आने के बाद समस्थिति में विश्राम करें।

लाभ: इस आसन में रीढ एवं पूरे शरीर में अच्छा खिंचाव होने से शरीर के रोम-रोम में रक्त संचार बढता है एवं साधक ताजगी व स्फूर्ति महसूस करता है। मेरूदण्ड एवं फुफ्फुसों में लचीलापन आ जाता है। रीढ की हड्डियों का दर्द व कम्पन दूर करने में सहायक है। भुजाओं और टांगों को मजबूत बनाता है। पेट और छाती के विकार दूर करने में भी सहायक है।

सावधानी: जिन लोगों को चक्कर आने की शिकायत हो, वे दीवार के सहारे या लेटकर अभ्यास करें, जो लोग अंगुलियों को आपस में नहीं मिला सकते, वे हाथों की अंगुलियों को ऊपर की तरफ तानते हुये भी कर सकते है।

राजस्थान गौरव सम्मान

राजस्थान गौरव सम्मान • जज अजय शर्मा, कलेक्टर जोगाराम सहित 40 विभूतियां अलंकृत
गरिमापूर्ण व्यक्तित्व का सम्मान समाज का दायित्व
सोशल रिपोर्टर | जयपुर
संस्कृति युवा संस्था की ओर से शुक्रवार को होटल डिग्गी पैलेस में प्रदेश की 40 लब्ध प्रतिष्ठित प्रतिभाओं को ‘राजस्थान गौरव’ अलंकरण से विभूषित किया गया। इन विभूतियों में न्यायाधीश अजय शर्मा, कलेक्टर डॉ. जोगाराम जांगिड़ व दैनिक भास्कर की डिप्टी न्यूज एडिटर लता खंडेलवाल भी शामिल हैं।
मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी ने कहा कि प्रदेश की विभूतियों को सम्मानित करना अपने आप में एक अतुलनीय कार्य है। संस्था पिछले 25 वर्षों से राजस्थान की विभिन्न प्रतिभाओं को गरिमापूर्ण तरीके से राजस्थान गौरव अलंकरण से विभूषित कर रही है। समारोह की अध्यक्षता परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने की।
इन विभूतियों को प्रशस्ति पत्र व दुप्पटा ओढ़ाकर किया सम्मानित
समारोह में प्रो. फिरोज, सत्येन्द्र सिंह, नगर 2020 नारायण टोकस, मधुसूदन मिश्रा, राजेश शर्मा, शुचि शर्मा, वरुण अग्रवाल, बीके पूनम दीदी, डॉ. भ्रातृ भूषण, महामंडलेश्वर महंत पुरुषोत्तम भारती, डॉ. रवींद्र गोस्वामी, योगगुरु ढाकाराम, विकास जैन, गोवर्धन चौधरी, मनोज माथुर, अजय शर्मा, ज्योतिष हरिप्रसाद शर्मा, दिनेश गुप्ता, राज बंसल, राहुल जैन, डॉ. दिवाकर अग्रवाल, कंचन खटाना, पपेटर सानिका सिंह, पं. रतन मोहन शर्मा, पहलवान भवानीसिंह
अमित शर्मा, डॉ. अम्रता यादवा व शैलेंद्र खंडेलवाल को भी राजस्थान गौरव अवार्ड सम्मानित किया गया।

 

नई गुंजाया जयपुर

नियमित योग,
नई गुंजाया जयपुर
योगापीस संस्थान एवं एकम योगा सेंटर के प्रमुख योगगुरु ढाकाराम सापकोटा ने कहा कि नियमित योग व्यक्ति को स्वस्थ, चुस्त-दुरुस्त रखने के साथ उसे शारीरिक, मानसिक व आत्मिक शांति प्रदान करने के साथ जीवन जीने की बेहतर कला है। योगा थैरेपी के माध्यम से नियमित योगासन व घरेलू उत्पादों के सहयोग से आमजन के असाध्य रोगों का उपचार हो सकता है। योगगुरु ढाकाराम योग विज्ञान एवं मानवीय चेतना विभाग, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में एक समारोह में स्टूडेंट्स एवं फैकल्टी को योगासनों के अभ्यास के बाद आयोजित योगाभ्यास के समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने
रखे निरोग: योगगुरु ढाकाराम
कहा कि कामकाज की व्यस्तता बढ़ती प्रतिस्पर्धा एवं बदलती जीवन शैली में योग ही एक ऐसा माध्यम है जिसे नियमित करके आप सदैव जीवन में निरोग रह सकते हैं। समारोह में योगा पीस
संस्थान व एकम् योगा सेंटर, जयपुर के प्रमुख योगगुरु ढाकाराम सापकोटा ने बड़ी संख्या में मौजूद स्टूडेंट्स व फैकल्टी को ओमकार ध्वनि एवं भजनों के साथ अर्द्धमत्स्येंद्रासन, पादहस्तासन,
धनुरासन व चक्रासन आदि का अभ्यास कराने कराया। साथ ही उन्हें योगा थेरेपी के विशेष सत्र में योगासनों के साथ रस्सी, कुर्सी, तकिए व मसंद आदि विभिन्न घरेलू उत्पादों की सहायता से हर असाध्य
रोग के उपचार के टिप्स दिए। योगगुरु ढाकाराम ने बताया कि सीनियर सिटीजन जिन्होंने कभी भी योगाभ्यास नहीं किया है, उन्हें भी घरेलू उत्पादों सहायता से योग का अभ्यास करावाकर स्वस्थ व फिट करना संभव है। योगगुरु ने नियमित योगाभ्यास करने के विभिन्न शरीरिक, मानसिक व आत्मिक फायदों की जानकारी देते हुए सभी से नियमित योग करने की नसीहत दी।
समारोह में प्रभारी डॉक्टर असीम जयंती देवी ने योगा पीस संस्थान के सभी सदस्यों का स्वागत किया। डॉक्टर लारा शर्मा ने मंच का संचालन किया। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉक्टर महबूब हुसैन व बीकाने विश्वविद्यालय के मेघनाथ, बृजे दीपचंद आदि मौजूद रहे।

Samachar Jagat

तनावमुक्त जीवन के लिए योग व मेडिटेशन जरूरी : ढाकाराम
जयपुर (कासं)। योगपीस संस्थान के योगाचार्य ढाकाराम सापकोटा द्वारा शनिवार को योग कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान योगाचार्य ने झालाना डूंगरी स्थित एपिसिनो कॉल सेंटर के कर्मचारियों को व्यस्ततम जीवन में कैसे मेडिटेशन और योग के माध्यम से तनावमुक्त रहे इसके बारे में बताया। उन्होंने कहा कि योग और मेडिटेशन जीवन का एक अभिन्न अंग है, जीवन की इस भागदौड़ में समय की कमी है तो वो इन सब का काम के
दौरान कुछ समय निकाल कर अभ्यास कर सकते है। तन और मन को स्वस्थ रखने के लिए योग कारगर
है। काम की व्यवस्तता के चलते कुर्सी पर योग व मेडिटेशन कैसे करें
इसका अभ्यास कराया।

Kalam a Rajasthan

योग विश्व रिकॉर्ड कार्यक्रम 4 को
जयपुर (कार्य)। योगापीस संस्थान एवं अखिल भारतीय योग महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में योग विश्व रिकॉर्ड कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। विश्व योग दिवस से पहले 4 मई को योगा वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड्स के लिए एकम योगा एकेडमी सुभाष नगर में होगा। कार्यक्रम संयोजक एवं योगापीस संस्थापक योगाचार्य ढाकाराम ने बताया कि जयपुर में पहली बार इस तरह का विश्व रिकॉर्ड कार्यक्रम होगा जिसमें प्रथम बार रोप पर शीर्षासन योग का ग्रुप योग विश्व रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। इसके साथ ही योगगुरु श्याम गावंडे द्वारा अष्टवक्रासना योगा में, योगिनी खुशबू खत्री द्वारा पश्चिमोत्तानासन योगा.