Dr. Shyam Singh Jadoun

योग थैरेपी-एक चमत्कारी चिकित्सा पद्यति

योग पीस संस्थान, शास्त्री नगर जयपुर। योग गुरू पूजनीय गुरूदेव ढ़ाकाराम जी के नेतृत्व में संचालित एक अद्वितीय, गहन सूक्ष्मता, वैज्ञानिकता तथा शोध व अनुभव पर आधारित एक श्रेष्ठ योग थैरेपी केन्द्र है। यह सत्य है कि वर्तमान युग में अतिव्यस्तता व भौतिकवादी दृष्टिकोण के कारण व्यक्ति तन व मन दोनोें की अथाह पीडा से करूण क्र्र्र्रंदन कर रहा है, जिस सुख की कामना में मुनष्य ने वस्तुओं को एकत्रित करने के लिए अपने तन, मन व ईमान को दाव पर लगा दिया था, संसाधन व सुविधाऐं तो सारी मिल गयीं लेकिन उस सुख की प्राप्ति अभी भी कोशों दूर है। प्रतिपल द्वन्द्वात्मक व तनाव पूर्ण दिनचर्या ने मनुष्य को मानसिक रोगी बना दिया है और रोग हमेशा मन से शरीर में आते हैं। ऐसा लगता है कि हमारी भौतिक समृद्धि ही हमारे लिए आत्मघाती सिद्ध हो रही है। शेष कमी पूर्ति ऐलोपेथी दवाइयों ने कर दी है। ऐलोपेथी चिकित्सा पद्यति ने मनुष्य को तन, मन व धन तीनों से खोखला सा कर दिया है। यद्यपि इमरजेन्सी एवं आकस्मिक स्थिति में ऐलोपेथी का कोई विकल्प नहीं है, परन्तु रोग ठीक नहीं हो सकते क्योंक यहां तन का इलाज किया जाता है, मन का नहीं । बिना मन का इलाज किये तन ठीक हो ही नहीं सकता।

चारों ओर से लुटापिटा मनुष्य अन्त में योग की शरण में आता है, योगाचार्यों के दिशा-निर्देशों को पालन करने की कोशिश करता है कुछ दिन पूरे जोश के साथ योग क्लास में आता है। लेकिन लम्बे समय की बुरी आदतें, बिखरा 2 तन-मन, जकडी हुई नाडिया, जोड व मांशपेशियां और दृढ़ संकल्प का अभाव, उसे इसके लिए अनुमति प्रदान नहीं करती हैं। ‘डूबते हुए को तिनके का सहारा काफी होता है’ इस कहावत पर काम करते हुए पूजनीय गुरूदेव ने अन्य योग गुरूओं के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में उक्त सपोर्टिगं योग चिकित्सा पद्यति को इजाद किया, अपने गहन अनुभव व जन सामान्य की आवश्यकता के अनुसार इसमें परिवर्तन एवं परिवर्धन किये तब उदय हुआ ‘योग पीस संस्थान, जयपुर।

जनरल योगा, स्लिमिंग योगा के साथ सपोर्टिंग योगा-योगा थेरेपी का एक अद्वितीय संगम है-योग पीस संस्थान। योग थेरेपी महर्षि पतंजली के अनुसार ‘प्रतिप्रसव’ की अवधारणा पर कार्य करती है अर्थात योग थेरेपी में आसन व प्रणायाम की ठहरने की अवधि दीर्घ, सुखद व सरल होती है जिससे रोग के कारण स्वयं में विलीन होकर शरीर को स्वाभाविक स्थिति में छोड़ देते हैं और रोगों कोे शरीर स्वतः ही समाप्त कर देता है।

उक्त संस्थान में शोध, आधुनिकीकरण, क्लासीफिकेशन, साहित्य लेखन, योग निर्देशकों का पुर्नप्रशिक्षण, रिपोर्टिग एवं डाटा विश्लेषण के कार्य निरन्तर जारी है।

भविष्य की अनन्त शुभकामनाओं के साथ

डाॅ. श्याम सिंह जोदौन

 

प्रेम व वात्सल्य की प्रतिमूर्ति-गूरूदेव ढ़ाकाराम जी

‘‘विद्या ददाति विनयम्’’ एवं निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा। उक्त प्रकार की अनेेकों उक्तियों को चरितार्थ करते हुए पूजनीय गुरूदेव ढ़ाकाराम जी सरल, सहज व सादा जीवन की प्रतिमूर्ति हैं। फेसबुक के माध्मय से सम्पर्क साधा, दूरभाष से वार्ता हुई तुरन्त मन ने निर्णय कर लिया कि ‘‘जो अभाव काफी लम्बे अरसे से मैं महसूस कर रहा था- एस सच्चे व सरल योगी की तलाश पूरी हुई।’’

मैं एक अरसे से योग के प्रति लगाव, अभ्यास एवं जूनून के साथ एक प्रायोगिक व वैज्ञानिक योगी की तलाश में था। अनेकों योग गुरूओं से जो सीखा हुआ था उस पर पूरा भरोसा नहीं हो पा रहा था, उसमें प्रमाणिकता, अनुभव, सहजता व वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अभाव था। योगा एकम एवं योगा पीस में आकर मेरे अनेकों प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हुए। योग थेरेपी से मेरा प्रथम बार परिचय आप श्री के केन्द्र पर ही हुआ। आपके निर्देशन मेें मैं निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर हूॅं।

हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम से प्रकट होंई भगवाना। जैसी पंक्ति के अनुसार कण-2 में भगवान है, आपने मुझे गले लगाकर, अपनी आत्मीयता वा वात्सल्य का प्रमाण दिया । सुबह 4 बजे से 11 बजे तक की व्यस्त दिनचर्या आपको एक कर्म योगी है। शिक्षण-प्रशिक्षण के दौरान आप एक ज्ञान योगी एवं ध्यान एवं कीर्तन के दौरान एक भक्ति योगी हैं। आपका व्यक्त्वि तीनों का प्रगाढ़ संगम है।